विशेषज्ञों की राय ऑनलाइन छुट्टी प्रणाली से शिक्षा विभाग में खत्म होगा पक्षपात का पुराना ढर्रा

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देहरादून। उत्तराखंड के शिक्षा विभाग में अब 'लाल फीताशाही' और फाइलों का दौर खत्म होने जा रहा है। प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में धामी सरकार ने एक बड़ा क्रांतिकारी कदम उठाया है। शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने घोषणा की है कि राज्य के हजारों शिक्षकों और विभागीय कार्मिकों को अब अवकाश के लिए अधिकारियों की गणेश परिक्रमा नहीं करनी होगी। जल्द ही 'विद्या समीक्षा केंद्र' के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन छुट्टी प्रबंधन मॉड्यूल शुरू होने जा रहा है।

शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के अनुसार, इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य विभाग में पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही तय करना है। इस मॉड्यूल के सक्रिय होने के बाद शिक्षक और अन्य कर्मचारी अपने मोबाइल या कंप्यूटर के माध्यम से कभी भी और कहीं से भी छुट्टी के लिए आवेदन कर सकेंगे। यह प्रक्रिया न केवल सरल होगी, बल्कि पूरी तरह समयबद्ध भी होगी, जिससे शिक्षकों के समय की बचत होगी और वे शिक्षण कार्यों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगे। नई प्रणाली में अवकाश स्वीकृति की प्रक्रिया को भी पूरी तरह ऑनलाइन रखा गया है। आवेदन करते ही संबंधित अधिकारी के पास नोटिफिकेशन जाएगा और निर्धारित समय सीमा के भीतर छुट्टी पर निर्णय लेना होगा। मंत्री ने बताया कि इससे शिक्षकों की छुट्टियां अब महज एक क्लिक पर मंजूर हो सकेंगी। साथ ही, शिक्षकों का अवकाश रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेगा, जिससे भविष्य में पेंशन या अन्य प्रशासनिक कार्यों के समय रिकॉर्ड खोजने की असुविधा नहीं होगी। शिक्षा मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को इस ऑनलाइन प्रणाली को तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य शिक्षा विभाग को पूरी तरह ई-गवर्नेंस आधारित बनाना है। शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि हम शिक्षा व्यवस्था में सुशासन और डिजिटल शासन को बढ़ावा दे रहे हैं। छुट्टी के बाद अब विभाग के अन्य प्रशासनिक कार्यों को भी चरणबद्ध तरीके से ऑनलाइन किया जाएगा। तकनीक के माध्यम से हम व्यवस्था में व्याप्त खामियों को दूर कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऑनलाइन छुट्टी प्रणाली लागू होने से विभाग में बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी और 'फेवरेटिज्म' (पक्षपात) पर लगाम लगेगी। शिक्षकों को अपनी जायज छुट्टी के लिए भी बाबू और अधिकारियों के चक्कर काटने से जो मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ती थी, यह कदम उसे पूरी तरह समाप्त कर देगा। उत्तराखंड शिक्षा विभाग के लिए यह कदम डिजिटल क्रांति की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।