राष्ट्रीय सिनेमन हब बनने के उत्तराखंड के ब्लूप्रिंट को वैश्विक खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों ने सराहा

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सगंध फसलों और परफ्यूमरी सेक्टर में अपनी एक अनूठी पहचान बना चुका उत्तराखंड अब देश का प्रमुख सिनेमन (दालचीनी) उत्पादन केंद्र बनने की दिशा में एक बहुत लंबी छलांग लगाने जा रहा है। राज्य सरकार के प्रयासों से देहरादून के सेलाकुई स्थित 'परफ़्युमरी एंड एरोमैटिक रिसर्च & डेवलपमेंट इंस्टिट्यूट' में 11 और 12 जून को सिनेमन पर दो दिवसीय उच्च स्तरीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार और वर्कशॉप का आयोजन किया जा रहा है। इस ऐतिहासिक आयोजन में श्रीलंका और इंडोनेशिया जैसे दुनिया के शीर्ष दालचीनी उत्पादक देशों के वैज्ञानिक, अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ, नामी उद्योगपति और प्रगतिशील किसान एक मंच पर जुटेंगे।

सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान सूबे के कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना की विस्तृत रूपरेखा साझा की। प्रेस वार्ता की शुरुआत में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लोकतांत्रिक इतिहास में सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने के गौरवशाली कीर्तिमान पर राज्य की ओर से बधाई भी दी। कृषि मंत्री गणेश जोशी ने बताया कि राज्य में एरोमैटिक फार्मिंग (सुगंधित खेती) की अपार संभावनाओं और किसानों की लगातार बढ़ रही आय को देखते हुए सरकार ने एक बेहद दूरदर्शी नीति 'उत्तराखण्ड महक क्रांति पॉलिसी 2026-36' लागू की है। अगले दस वर्षों के विजन वाली इस नीति के तहत राज्य के करीब 23 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को सुगंधित फसलों की खेती से कवर किया जाएगा, जिससे सीधे तौर पर 91 हजार से अधिक किसानों को सीधे आर्थिक लाभ पहुंचेगा। इस महा-अभियान के तहत पूरे उत्तराखंड में सात विशिष्ट 'एरोमा वैली' बनाई जा रही हैं। इसी कड़ी में चंपावत और नैनीताल जिलों के लगभग 5200 हेक्टेयर क्षेत्र में विशेष रूप से 'सिनेमन वैली' विकसित की जा रही है। यह अनूठी परियोजना स्थानीय किसानों, नए एग्री-स्टार्टअप्स और प्रोसेसिंग इंडस्ट्री के लिए प्रगति के बंद दरवाजे खोलेगी। सरकार का अंतिम लक्ष्य उत्तराखंड को उच्च गुणवत्ता वाले सिनेमन प्रॉडक्शन, प्रोसेसिंग और ग्लोबल एक्सपोर्ट के नक्शे पर राष्ट्रीय लीडर के रूप में स्थापित करना है। राज्य में पिछले दो दशकों में हुए क्रांतिकारी बदलावों का जिक्र करते हुए कृषि मंत्री ने बताया कि साल 2003 में जहां इस एरोमैटिक सेक्टर का कुल कारोबार महज 2 करोड़ रुपये था, वहीं साल 2025 तक यह शानदार रिकॉडिंग के साथ बढ़कर 100 करोड़ रुपये से अधिक के आंकड़े को पार कर चुका है। वर्तमान में संस्थान की वैज्ञानिक पहलों के चलते राज्य की 10 हजार हेक्टेयर भूमि पर एरोमैटिक कल्टिवेशन हो रहा है, जिससे 109 अरोमा क्लस्टर्स के माध्यम से लगभग 29 हजार किसान और 200 से अधिक फील्ड डिस्टेलेशन यूनिट्स पूरी मजबूती से जुड़ी हुई हैं। सेलाकुई (सीएपी) के निदेशक डॉ. नृपेन्द्र चौहान ने बताया कि इस दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का मुख्य विषय 'सिनेमन: इनोवेशन्स इन प्रोपेगेशन, सस्टेनेबल कल्टीवेशन एंड पोस्ट हार्वेस्ट टेक्नोलॉजीज' रखा गया है। इस सेमिनार में श्रीलंका के प्रसिद्ध 'नेशनल सिनेमन रीसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर' के चोटी के विशेषज्ञ, 'प्योर सिनेमन एक्सपोर्टस' के निदेशक और इंडोनेशिया के 'रिसर्च सेंटर फॉर एस्टेट क्राप्स' के वरिष्ठ वैज्ञानिक विशेष रूप से अपने शोध और व्यावहारिक अनुभव साझा करेंगे। इसके साथ ही देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञ, 40 से अधिक डेलीगेट्स और विभिन्न जिलों से आए 50 प्रगतिशील सिनेमन फार्मर्स फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड्स, वैल्यू एडिशन, आधुनिक कल्टीवेशन और एक्सपोर्ट रिक्वायरमेंट्स जैसे संवेदनशील व तकनीकी विषयों पर मंथन करेंगे। बिना किसी जल्दबाजी के, बेहद पारदर्शी और नियमों के दायरे में रहकर तैयार की गई यह कार्ययोजना उत्तराखंड के किसानों के लिए समृद्धि का नया सवेरा लेकर आने वाली साबित होगी।