उत्तराखंड शिक्षा विभाग समाचार: कुंवर सिंह रावत के सख्त आदेश से सुस्त जिला अधिकारियों में मची खलबली

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देहरादून। उत्तराखंड शिक्षा महानिदेशालय ने राज्य के सरकारी स्कूलों और शिक्षा कार्यालयों में अपनी मूल तैनाती छोड़कर अन्य जगहों पर 'अटैच' (संबद्ध) होकर मलाई काट रहे शिक्षकों के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। महानिदेशालय ने राज्य के सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी करते हुए ऐसे सभी शिक्षकों की नए सिरे से बिल्कुल सटीक सूची तलब की है। अपर निदेशक (महानिदेशालय) कुंवर सिंह रावत द्वारा जारी इस आदेश के बाद से ही शिक्षा महकमे में हड़कंप मच गया है।

दरअसल, महानिदेशालय ने यह सख्त कदम जिलों से भेजी गई पिछली सूची में पाई गई गंभीर विसंगतियों और लापरवाही के बाद उठाया है। इससे पहले भी विभाग ने संबद्ध शिक्षकों और कर्मचारियों का पूरा ब्योरा मांगा था, लेकिन जिला स्तर के अधिकारियों ने जो डेटा भेजा, उसने सबको चौंका दिया। भेजी गई पुरानी लिस्ट में ऐसी अजीबोगरीब खामियां थीं कि कागजों पर एक ही शिक्षक को दो से लेकर तीन अलग-अलग जगहों पर संबद्ध (अटैच) दर्शाया गया था। इस बड़ी लापरवाही और त्रुटि को सुधारने के लिए अब महानिदेशालय ने सख्त लहजे में नए सिरे से फ्रेश डेटा मांगा है। अपर निदेशक कुंवर सिंह रावत ने अपने नए निर्देशों में साफ कर दिया है कि इस बार सूची तैयार करने में कोई भी घालमेल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जारी गाइडलाइंस के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं। सूची में केवल वही शिक्षक शामिल किए जाएं, जो वास्तव में जिस स्थान से कार्ययोजित हुए हों। शिक्षक से जुड़ी सभी जानकारियां फॉर्मेट के संबंधित कॉलम में ही सही ढंग से भरी जाएं। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी एक कार्मिक या शिक्षक की गिनती एक से अधिक बार न हो पाए।महानिदेशालय का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में शिक्षकों की वास्तविक संख्या और उनकी सही तैनाती का सटीक पता लगाना है। इसके साथ ही, विभाग ने उन 'रसूखदार' शिक्षकों की भी अलग से कुंडली मांगी है, जो अपनी संबद्धता (अटैचमेंट) की निर्धारित समय-सीमा खत्म होने के बावजूद राजनीतिक या प्रशासनिक सांठगांठ के दम पर पुराने कार्ययोजित स्थल पर ही अंगद के पैर की तरह जमे हुए हैं। शिक्षा विभाग के इस सख्त कदम से साफ है कि आने वाले दिनों में कार्यालयों में जमे शिक्षकों को वापस अपने मूल स्कूलों में लौटना होगा, जिससे दूरदराज के स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर हो सकेगी।