भक्ति और खेल का अनूठा संगम: हरकी पैड़ी से कांवड़ उठाकर ऋषिकेश को पैदल निकलीं खेल मंत्री रेखा आर्या, लिए 2 बड़े संकल्प

Blog
 Image

हरिद्वार। उत्तराखंड की खेल मंत्री रेखा आर्या ने सोमवार को धार्मिक आस्था के साथ-साथ राष्ट्रगौरव से जुड़ा एक अनूठा संदेश देते हुए हरिद्वार के सुप्रसिद्ध हरकी पैड़ी से अपनी पैदल कांवड़ यात्रा की शुरुआत की। सुबह-सवेरे भगवान शिव और मां गंगा के जयकारों के बीच, पूरे विधि-विधान से गंगा पूजन कर उन्होंने पवित्र गंगाजल ग्रहण किया और कांवड़ यात्रा पर रवाना हुईं।

कांवड़ यात्रा के दौरान भोलेनाथ की भक्ति के गीत गूंजते रहे। यात्रा में साधु-संतों के साथ बड़ी संख्या में खेल प्रेमी और श्रद्धालु भी मौजूद रहे। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्रपुरी महाराज, महामंत्री महंत हरि गिरि महाराज समेत संत समाज के कई प्रमुख लोग इस धार्मिक यात्रा के साक्षी बने। कांवड़ यात्रा शुरू करने से पहले रेखा आर्या अपने पति के साथ हरिद्वार पहुंचीं और मां गंगा का पूजन-अर्चन किया। उन्होंने देश और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद उन्होंने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज और निरंजनी अखाड़े के सचिव रामरतन गिरि से मुलाकात की और उन्हें कांवड़ यात्रा में शामिल होने का निमंत्रण दिया। इस बार खेल मंत्री की कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है। उन्होंने यात्रा के दौरान देश के खेल भविष्य से जुड़े दो महत्वपूर्ण संकल्प लिए हैं। पहला संकल्प है कि भारत को वर्ष 2036 के ओलंपिक खेलों की मेजबानी मिले और देश इन खेलों का सफल आयोजन करे। रेखा आर्या ने कहा कि देश में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। जरूरत इन प्रतिभाओं को बेहतर मंच, सुविधाएं और अवसर उपलब्ध कराने की है। उन्होंने विश्वास जताया कि भगवान भोलेनाथ के आशीर्वाद से उनके दोनों संकल्प पूरे होंगे। उन्होंने कहा कि भारत को खेलों में नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए सरकार, खेल संगठनों, खिलाड़ियों और समाज को मिलकर प्रयास करना होगा। कांवड़ यात्रा में शामिल साधु-संतों ने खेल मंत्री के संकल्प की सराहना की। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि खेलों के माध्यम से देश का गौरव बढ़ाना भी राष्ट्रसेवा का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने भगवान शिव से प्रार्थना की कि रेखा आर्या के दोनों संकल्प पूरे हों और भारत खेल जगत में नई ऊंचाइयां हासिल करे। उन्होंने कहा कि यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि युवाओं को खेलों से जोड़ने और देश में खेल संस्कृति को मजबूत करने का संदेश भी देती है। रेखा आर्या पिछले वर्ष भी हरकी पैड़ी से कांवड़ लेकर पैदल वीरभद्र मंदिर पहुंची थीं। तब उन्होंने करीब 26 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर भगवान शिव का जलाभिषेक किया था और बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का संकल्प लिया था। इस बार उन्होंने अपने संकल्प का दायरा देश के खेल भविष्य तक बढ़ाया है। 2036 ओलंपिक की मेजबानी और भारत को खेलों की विश्व महाशक्ति बनाने का लक्ष्य लेकर शुरू हुई यह यात्रा धार्मिक आस्था के साथ खेलों के प्रति जागरूकता का संदेश भी दे रही है। हरकी पैड़ी से उठी कांवड़ अब वीरभद्र मंदिर पहुंचेगी, जहां गंगाजल से भगवान शिव का रुद्राभिषेक किया जाएगा। इस दौरान रेखा आर्या के दोनों संकल्पों की सफलता के लिए प्रार्थना होगी।