देहरादून। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने आईएएस प्रशिक्षु अधिकारियों से कहा कि सिविल सेवा केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी निभाने का माध्यम नहीं, बल्कि देश और समाज की सेवा का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने अधिकारियों से ‘सेवाभाव और कर्तव्यबोध’ को अपना मार्गदर्शक मंत्र बनाने का आह्वान किया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि सच्चे नेतृत्व की पहचान पद और शक्ति से नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में भी नैतिकता और सत्यनिष्ठा के साथ निर्णय लेने की क्षमता से होती है।
उपराष्ट्रपति ने प्रशिक्षु अधिकारियों के प्रशिक्षण के दूसरे चरण के समापन समारोह को संबोधित करते हुए उन्हें सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूरा करने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि सिविल सेवाओं ने देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। नीतियों और योजनाओं को कागज से निकालकर जमीनी स्तर पर लागू करने में प्रशासनिक अधिकारी महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करते हैं। विकसित भारत@2047 के संकल्प का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने अधिकारियों से विकास योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की अपील की। उन्होंने कहा कि विकास तभी सार्थक माना जाएगा, जब उसका लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे और कोई भी व्यक्ति विकास की मुख्यधारा से बाहर न रहे। उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों से निर्णय लेते समय संवेदनशीलता और जनहित को प्राथमिकता देने को कहा। प्रशासन में लिए गए फैसलों का सीधा असर आम नागरिक के जीवन पर पड़ता है, इसलिए अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारियों को पूरी ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ निभाना चाहिए। सिविल सेवाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को देश के बदलते सामाजिक परिदृश्य का महत्वपूर्ण संकेत बताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि 2024 बैच में करीब 41 प्रतिशत अधिकारी महिलाएं हैं। उन्होंने इसे नारी शक्ति का प्रभावशाली प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि प्रतिभा किसी रूढ़ धारणा की मोहताज नहीं होती। दृढ़ इच्छाशक्ति और मेहनत के बल पर महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं। प्रशासनिक सेवाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी देश के लिए सकारात्मक बदलाव का संकेत है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि लोक सेवा की आधारशिला चरित्र और सत्यनिष्ठा है। अधिकारी के सामने कई बार ऐसी परिस्थितियां आएंगी, जहां निर्णय लेना आसान नहीं होगा। ऐसे समय में नैतिक मूल्यों से समझौता किए बिना सही फैसला लेना ही सच्चे नेतृत्व की पहचान होगी। उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों को याद दिलाया कि सरकारी पद के साथ बड़ी जिम्मेदारी भी आती है। इसलिए उन्हें अपने निर्णयों में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। समारोह में उपराष्ट्रपति ने प्रशिक्षु अधिकारियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उम्मीद जताई कि वे अपनी प्रशासनिक क्षमता के साथ संवेदनशीलता, ईमानदारी और सेवाभाव को भी मजबूत बनाए रखेंगे और विकसित भारत के निर्माण में प्रभावी योगदान देंगे।

