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वनों की रक्षा करने वालों की सुरक्षा: उत्तराखंड समर्पित वन रक्षक इकाइयों के लिए आधुनिक रक्षात्मक गियर और हथियारों में 59 लाख कर रहा निवेश

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देहरादून। उत्तराखंड में वन और वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ ही अवैध खनन और तस्करी पर अंकुश लगाना वन विभाग के लिए लगातार बड़ी चुनौती बना हुआ है। इन चुनौतियों से निपटने के दौरान वनकर्मियों को अक्सर संगठित तस्करों और खनन माफियाओं से सीधा टकराव करना पड़ता है। ऐसे हालात में उनकी सुरक्षा के लिए आधुनिक हथियारों और पर्याप्त संसाधनों की कमी लंबे समय से महसूस की जा रही थी। अब वन विभाग इस समस्या को दूर करने की दिशा में ठोस कदम उठाने जा रहा है।

वन विभाग ने वनकर्मियों को हथियारों से लैस करने की तैयारी तेज कर दी है। विभाग ने शासन को प्रस्ताव भेजकर 32 पिस्तौल MK-II और 30.06 एसपी राइफल समेत आधुनिक हथियारों की मांग की है। इसके अलावा अन्य जरूरी सुरक्षा उपकरणों की भी मांग रखी गई है। इस पूरे प्रस्ताव की अनुमानित लागत 59.41 लाख रुपये बताई गई है। राज्य के विशेष रूप से पश्चिमी वृत्त के कई वन क्षेत्र संवेदनशील माने जाते हैं। यहां वन संपदा की तस्करी और नदियों में अवैध खनन के मामले बार-बार सामने आते रहते हैं। कई बार स्थिति इतनी बिगड़ जाती है कि वनकर्मी और माफिया आमने-सामने आ जाते हैं। ऐसे में पुराने हथियारों या अपर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के कारण वनकर्मियों की जान को खतरा बना रहता है। वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि सरकार वनकर्मियों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह गंभीर है। उन्होंने कहा, “वनकर्मी पूरी बहादुरी और समर्पण से अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं। हम उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हथियारों की आपूर्ति के साथ-साथ नियमों में जरूरी बदलाव भी करने जा रहे हैं। केवल हथियारों की खरीद ही समस्या का समाधान नहीं है। हथियारों के लाइसेंस जारी कराने की जटिल और लंबी प्रक्रिया भी एक बड़ी बाधा बनी हुई है। वर्तमान व्यवस्था में लाइसेंस प्राप्त करने में काफी समय लगता है, जिससे जरूरत के समय हथियार उपलब्ध नहीं हो पाते। इसी समस्या को दूर करने के लिए वन विभाग अब पुलिस विभाग की तर्ज पर वन विभाग को भी हथियार लाइसेंस जारी करने के कुछ अधिकार देने की मांग कर रहा है। इससे प्रक्रिया तेज और आसान हो सकेगी।

हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वन विभाग के एक एसडीओ के साथ मारपीट की घटना सामने आई थी। इस घटना के पीछे खनन माफियाओं का हाथ बताया गया। इसके अलावा कई इलाकों में वनकर्मियों को बंधक बनाने और उनकी पिटाई की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। इन घटनाओं ने पूरे विभाग में सुरक्षा को लेकर चिंता को और बढ़ा दिया है। वनकर्मी लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि उन्हें अधिक अधिकार दिए जाएं और उन्हें आधुनिक हथियारों से लैस किया जाए। उनका कहना है कि बिना पर्याप्त सुरक्षा और कानूनी समर्थन के माफियाओं के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करना मुश्किल है। वन विभाग अब अपनी रणनीति में बदलाव लाते हुए वनकर्मियों को मजबूत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यदि प्रस्तावित हथियार खरीद और लाइसेंस संबंधी नियमों में शिथिलता समय पर लागू हो जाती है, तो न केवल वनकर्मियों की सुरक्षा बेहतर होगी, बल्कि राज्य की वन संपदा और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को भी नई मजबूती मिलेगी। वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि आधुनिक हथियारों और बेहतर संसाधनों से लैस वनकर्मी संवेदनशील क्षेत्रों में अधिक प्रभावी ढंग से काम कर सकेंगे और अवैध गतिविधियों पर सख्त नियंत्रण लगाया जा सकेगा।