थारू-बोक्सा समाज को गुमराह किया गया: मुख्यमंत्री धामी ने विपक्ष पर लगाया जमीन हड़पने के भ्रम का आरोप

Blog
 Image

उत्तराखंड विधानसभा का विशेष सत्र आज राजनीतिक अखाड़े में तब्दील हो गया। 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' (महिला आरक्षण) पर चर्चा के लिए बुलाए गए इस सत्र में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विपक्ष पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला। मुख्यमंत्री ने लोकसभा में आरक्षण विधेयक के विफल होने के लिए राहुल गांधी और अखिलेश यादव के नेतृत्व वाले गठबंधन को जिम्मेदार ठहराते हुए उनकी तुलना 'कौरवों' से कर दी। उन्होंने दो टूक कहा कि जिस तरह माता सीता के अपमान से रावण का अंत हुआ था, उसी तरह नारी शक्ति के अधिकारों को रोकने वालों का भी राजनीतिक पतन निश्चित है।

मुख्यमंत्री धामी ने सदन में आंकड़ों की झड़ी लगाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले 11 वर्षों में जेंडर बजट में पांच गुना वृद्धि की है और हालिया बजट में बेटियों के लिए 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा, "विपक्ष ने विरोध सिर्फ इसलिए किया क्योंकि वे नहीं चाहते थे कि इसका श्रेय मोदी जी को मिले। जबकि मोदी जी यह श्रेय सबको देने को तैयार थे। देश की आधी आबादी के साथ यह बहुत बड़ा धोखा है।" मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि गृह मंत्री अमित शाह ने पहले ही साफ कर दिया था कि आरक्षण से किसी राज्य की सीटें नहीं घटेंगी, बल्कि बढ़ी हुई सीटें महिलाओं को ही मिलनी थीं। चर्चा के दौरान सदन में राष्ट्रवाद को लेकर भी भारी हंगामा हुआ। भाजपा विधायक दिलीप रावत ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस का राष्ट्रवाद ऐसा था जिसने कश्मीर से कश्मीरी पंडितों को भागने पर मजबूर कर दिया। इस पर पलटवार करते हुए कांग्रेस विधायक सुमित हृदयेश ने इतिहास याद दिलाते हुए कहा कि यह कांग्रेस ही थी जिसने पाकिस्तान के दो टुकड़े किए थे। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जबरदस्त नारेबाजी और नोकझोंक देखने को मिली।

मुख्यमंत्री धामी ने पिछले विधानसभा चुनाव में अपनी हार का जिक्र करते हुए भावुक कार्ड भी खेला। उन्होंने कहा, "मेरे खिलाफ दुष्प्रचार किया गया कि यदि मैं चुनाव जीता तो थारू-बोक्सा जनजाति की जमीनें छीन ली जाएंगी। इस अफवाह के कारण मैं चुनाव हार गया, लेकिन आज सब देख रहे हैं कि वे बातें पूरी तरह बेबुनियाद और झूठी साबित हुई हैं। चारधाम यात्रा को उत्तराखंड की 'लाइफलाइन' बताते हुए सीएम ने उन लोगों को आड़े हाथों लिया जो यात्रा की भीड़ के वीडियो और रील बनाकर सोशल मीडिया पर राज्य की छवि खराब कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "आपको हमारा विरोध करना है तो शौक से कीजिए, लेकिन कम से कम अपनी चारधाम यात्रा को तो बदनाम मत कीजिए। सरकार सुरक्षा और सम्मान के साथ यात्रा संचालित कर रही है।" मुख्यमंत्री ने केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उज्ज्वला योजना ने महिलाओं को चूल्हे के धुएं से मुक्ति दी है, जबकि लखपति दीदी और ड्रोन दीदी जैसी योजनाओं से पहाड़ की महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य में रसोई गैस सिलेंडर की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। दूसरी ओर, विपक्षी दल कांग्रेस ने सदन में सरकार को घेरने की पूरी कोशिश की। विपक्ष का कहना है कि सरकार केवल इवेंट मैनेजमेंट कर रही है और धरातल पर महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है। कांग्रेस ने मांग की कि 2023 के मूल आरक्षण विधेयक को बिना किसी शर्त के तुरंत लागू किया जाए। विधानसभा का यह विशेष सत्र न केवल महिला आरक्षण पर केंद्रित रहा, बल्कि इसने आने वाले राजनीतिक संघर्षों की एक बड़ी रूपरेखा भी तय कर दी है। मुख्यमंत्री के कड़े संबोधन और विपक्ष के हंगामे ने यह साफ कर दिया है कि 'नारी शक्ति' का मुद्दा अब उत्तराखंड की राजनीति के केंद्र में रहने वाला है।